किसान आंदोलन में उबाल: बिरधवाल हेड की ओर महाकूच, भारी पुलिस बल तैनात
किसान आंदोलन ने एक बार फिर जोर पकड़ लिया है। बिरधवाल हेड की ओर किसानों के महाकूच के बीच हालात तनावपूर्ण हो गए हैं। किसानों का काफिला पुलिस का पहला नाका तोड़कर आगे बढ़ा। ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और बसों के जरिए बड़ी संख्या में किसान आंदोलन में शामिल होने पहुंचे। पुलिस ने बिरधवाल हेड से करीब 30 किलोमीटर पहले किसानों के काफिले को रोकने का प्रयास किया, जिसके बाद घटनाक्रम ने नया मोड़ ले लिया। पुलिस द्वारा रास्ते में रोके जाने के बाद सैकड़ों किसानों ने अपने वाहन छोड़ दिए और पैदल ही बिरधवाल हेड की ओर कूच करना शुरू कर दिया। किसानों के इस कदम से मौके पर हलचल बढ़ गई। आंदोलन में शामिल किसान आगे बढ़ने पर अड़े रहे, जबकि पुलिस प्रशासन स्थिति को नियंत्रित करने में जुटा रहा। गोपालसर के पास किसान और पुलिस आमने-सामने आ गए। यहां तनावपूर्ण हालात बने हुए हैं। किसानों के लगातार आगे बढ़ने और पुलिस की तैनाती के बीच प्रशासन के सामने कानून-व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती है। अनूपगढ़ के सीओ जयप्रकाश बेनीवाल के नेतृत्व में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। किसानों के कूच के चलते माइलेटी से बिरधवाल हेड तक सड़क मार्ग अवरुद्ध होने की जानकारी सामने आई है। इससे इस मार्ग पर यातायात प्रभावित हुआ है। मौके की स्थिति को देखते हुए लोगों को आवाजाही में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। किसानों के महाकूच के बाद अब सबकी निगाहें बिरधवाल हेड पर टिकी हैं। आंदोलन आगे क्या रुख लेगा और प्रशासन किसानों से बातचीत कर स्थिति को सामान्य कर पाएगा या नहीं, इस पर नजर बनी हुई है। फिलहाल प्राथमिकता मौके पर शांति बनाए रखने और यातायात व्यवस्था बहाल करने की है।
राजस्थान RGHS: 2 हजार से महंगी जांचों के खर्च में 80.6% की गिरावट
राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (RGHS) में 2,000 रुपए से अधिक की जांचों के लिए प्री-अप्रूवल व्यवस्था लागू होने के बाद खर्च में बड़ी कमी दर्ज होने का दावा किया गया है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, महंगी जांचों पर होने वाला खर्च 50.03 करोड़ रुपए से घटकर 9.70 करोड़ रुपए रह गया। इसके साथ ही ऐसी जांचों से जुड़े ट्रांजेक्शन में भी 79 प्रतिशत की गिरावट बताई गई है। RGHS के तहत महंगी जांचों के लिए पूर्व अनुमति यानी प्री-अप्रूवल की व्यवस्था का उद्देश्य जांचों पर होने वाले खर्च की निगरानी करना है। दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, इस व्यवस्था के बाद संबंधित जांचों पर खर्च में 80.6 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। खर्च में आई यह गिरावट योजना के तहत चिकित्सा जांचों के भुगतान और स्वीकृति प्रक्रिया को लेकर महत्वपूर्ण मानी जा रही है। आंकड़ों के अनुसार, 2,000 रुपए से अधिक की जांचों से जुड़े ट्रांजेक्शन में भी करीब 79 प्रतिशत की कमी आई है। प्री-अप्रूवल के तहत ऐसी जांचों के लिए पहले अनुमति की प्रक्रिया पूरी करनी होती है। इससे जांचों की स्वीकृति और खर्च की निगरानी की व्यवस्था मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है। इस व्यवस्था का उद्देश्य अनावश्यक जांचों और खर्च पर नियंत्रण रखना है। हालांकि, इसके वास्तविक प्रभाव का आकलन करने के लिए यह देखना भी जरूरी होगा कि मरीजों को जरूरी जांच समय पर मिल रही हैं या नहीं और प्री-अप्रूवल के कारण उपचार में किसी तरह की देरी तो नहीं हो रही। RGHS राजस्थान में पात्र लाभार्थियों को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने वाली महत्वपूर्ण योजना है। ऐसे में खर्च पर नियंत्रण के साथ-साथ मरीजों को समय पर और सुचारु उपचार उपलब्ध कराना भी उतना ही महत्वपूर्ण रहेगा।
पंचायत चुनाव में हाथ से लिखे जाएंगे करोड़ों नाम! मतदान दलों पर बढ़ेगा काम का बोझ
राजस्थान में पंचायतीराज चुनाव को लेकर मतदान दलों के सामने इस बार बड़ी चुनौती खड़ी होने की संभावना है। प्रदेश में 4.03 करोड़ से अधिक मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे। चुनाव की प्रक्रिया में जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों का चुनाव ईवीएम से कराया जाएगा, जबकि सरपंच और वार्ड पंच के चुनाव मतपत्रों के जरिए होंगे। ऐसे में मतदानकर्मियों को मतपत्रों पर प्रत्याशियों के नाम हाथ से लिखने की जिम्मेदारी निभानी होगी। चुनाव की तैयारियों के दौरान मतदान दलों को मतपत्रों पर प्रत्याशियों के नाम लिखने, उनकी जांच करने और मतदान केंद्रों को तैयार करने जैसे कई काम पूरे करने होंगे। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इन सभी प्रक्रियाओं के लिए अधिकतम 17 घंटे का समय मिलने की बात कही जा रही है। इतने कम समय में सभी व्यवस्थाएं पूरी करना मतदानकर्मियों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है। सरपंच और वार्ड पंच पदों के लिए अलग-अलग मतपत्रों की व्यवस्था रहेगी। प्रत्येक ग्राम पंचायत और वार्ड में प्रत्याशियों की संख्या के अनुसार मतपत्र तैयार करने होंगे। प्रत्याशियों के नाम सही तरीके से लिखना और उनकी जांच करना भी जरूरी होगा, ताकि मतदान के दौरान किसी तरह की परेशानी न आए। दिए गए अनुमान के अनुसार, यदि औसतन प्रत्येक पद के लिए 10 प्रत्याशी मैदान में रहते हैं, तो मतदानकर्मियों को मतपत्रों पर करोड़ों नाम लिखने पड़ सकते हैं। इस प्रक्रिया में 40 करोड़ से अधिक नाम लिखे जाने का अनुमान जताया जा रहा है। इसके अलावा, 20 अतिरिक्त मतपत्रों के प्रावधान से भी मतदान दलों का काम बढ़ सकता है। मतपत्र तैयार करने की प्रक्रिया में समय प्रबंधन, कर्मचारियों की उपलब्धता और नामों की शुद्धता अहम रहेगी। इतने बड़े स्तर पर चुनाव संपन्न कराने के लिए मतदान दलों को व्यवस्थित तरीके से काम करना होगा। अब देखना होगा कि निर्वाचन व्यवस्था इस चुनौती से निपटने के लिए क्या अतिरिक्त इंतजाम करती है। नोट: 4.03 करोड़ मतदाताओं, 17 घंटे की समय-सीमा और 40 करोड़ से अधिक नाम लिखने के अनुमान की आधिकारिक पुष्टि निर्वाचन विभाग के आदेशों और चुनाव कार्यक्रम से अवश्य करें।
मदन राठौड़ के बयान से राजस्थान BJP में हलचल, क्या संगठन में होगा बड़ा बदलाव?
राजस्थान की राजनीति में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के संगठनात्मक बदलावों को लेकर चर्चाएं तेज हैं। प्रदेश में संभावित मंत्रिमंडल फेरबदल की अटकलों के बीच अब पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ की भूमिका और नए प्रदेश अध्यक्ष के संभावित चेहरे को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। हालांकि, प्रदेश अध्यक्ष को बदले जाने को लेकर अभी किसी आधिकारिक फैसले की पुष्टि नहीं है। मदन राठौड़ के पाकिस्तान से जुड़े बयान को लेकर राजनीतिक चर्चाएं जारी हैं। इस बयान के बाद उनके राजनीतिक रुख और पार्टी के भीतर संभावित असर को लेकर अलग-अलग तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। हालांकि, इस मुद्दे के आधार पर उनके पद पर संकट होने का निष्कर्ष निकालना फिलहाल जल्दबाजी होगी। राजस्थान में संभावित मंत्रिमंडल फेरबदल को लेकर चर्चाओं के बीच BJP संगठन में भी बदलाव की संभावना पर नजरें टिकी हैं। राजनीतिक गलियारों में नए प्रदेश अध्यक्ष के नाम को लेकर चर्चा हो रही है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या पार्टी संगठन में नए चेहरे को जिम्मेदारी देगी या मदन राठौड़ अपने पद पर बने रहेंगे। प्रदेश अध्यक्ष के बदलाव को लेकर फिलहाल स्थिति स्पष्ट नहीं है। पार्टी नेतृत्व की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा सामने आने तक इन चर्चाओं को अटकलों के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। आने वाले दिनों में BJP के संगठनात्मक फैसले राजस्थान की सियासत की दिशा को लेकर अहम संकेत दे सकते हैं।
शीतला माता मंदिर जा रहे श्रद्धालुओं पर कहर, बेकाबू ट्रक ने 13 की जान ली
मध्य प्रदेश के ग्वालियर में नवरात्रि के दौरान शीतला माता मंदिर जा रहे श्रद्धालुओं के साथ भीषण सड़क हादसा हो गया। धान से भरे एक बेकाबू ट्रक ने श्रद्धालुओं को अपनी चपेट में ले लिया। हादसे में अब तक 13 लोगों की मौत होने की खबर है, जबकि 35 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं। घायलों में दो पुलिसकर्मी भी शामिल हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, श्रद्धालु नवरात्रि के अवसर पर शीतला माता मंदिर में दर्शन के लिए जा रहे थे। इसी दौरान धान से भरा ट्रक बेकाबू हो गया और रास्ते में मौजूद श्रद्धालुओं को कुचलता चला गया। ट्रक ने पुलिस बैरिकेड भी तोड़ दिए और मंदिर की बाहरी दीवार तथा गेट से जा टकराया। भीषण हादसे के बाद घटनास्थल पर चीख-पुकार मच गई। आसपास मौजूद लोगों ने घायलों की मदद की और उन्हें अस्पताल पहुंचाने में सहयोग किया। सूचना मिलने पर पुलिस और प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंचीं। घायलों को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। एसएसपी धर्मवीर सिंह के मुताबिक, धान से भरा ट्रक पुलिस बैरिकेड तोड़कर अनियंत्रित हो गया था। इसके बाद ट्रक मंदिर की बाहरी दीवार और गेट से टकरा गया। हादसे में कई श्रद्धालु इसकी चपेट में आ गए। घटना में दो पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं। नवरात्रि के दौरान हुए इस दर्दनाक हादसे से इलाके में शोक का माहौल है। हादसे के कारणों और ट्रक के बेकाबू होने की परिस्थितियों को लेकर आगे की जानकारी का इंतजार है।