
राजस्थान में पंचायतीराज चुनाव को लेकर मतदान दलों के सामने इस बार बड़ी चुनौती खड़ी होने की संभावना है। प्रदेश में 4.03 करोड़ से अधिक मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे। चुनाव की प्रक्रिया में जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों का चुनाव ईवीएम से कराया जाएगा, जबकि सरपंच और वार्ड पंच के चुनाव मतपत्रों के जरिए होंगे। ऐसे में मतदानकर्मियों को मतपत्रों पर प्रत्याशियों के नाम हाथ से लिखने की जिम्मेदारी निभानी होगी।
चुनाव की तैयारियों के दौरान मतदान दलों को मतपत्रों पर प्रत्याशियों के नाम लिखने, उनकी जांच करने और मतदान केंद्रों को तैयार करने जैसे कई काम पूरे करने होंगे। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इन सभी प्रक्रियाओं के लिए अधिकतम 17 घंटे का समय मिलने की बात कही जा रही है। इतने कम समय में सभी व्यवस्थाएं पूरी करना मतदानकर्मियों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
सरपंच और वार्ड पंच पदों के लिए अलग-अलग मतपत्रों की व्यवस्था रहेगी। प्रत्येक ग्राम पंचायत और वार्ड में प्रत्याशियों की संख्या के अनुसार मतपत्र तैयार करने होंगे। प्रत्याशियों के नाम सही तरीके से लिखना और उनकी जांच करना भी जरूरी होगा, ताकि मतदान के दौरान किसी तरह की परेशानी न आए।
दिए गए अनुमान के अनुसार, यदि औसतन प्रत्येक पद के लिए 10 प्रत्याशी मैदान में रहते हैं, तो मतदानकर्मियों को मतपत्रों पर करोड़ों नाम लिखने पड़ सकते हैं। इस प्रक्रिया में 40 करोड़ से अधिक नाम लिखे जाने का अनुमान जताया जा रहा है। इसके अलावा, 20 अतिरिक्त मतपत्रों के प्रावधान से भी मतदान दलों का काम बढ़ सकता है।
मतपत्र तैयार करने की प्रक्रिया में समय प्रबंधन, कर्मचारियों की उपलब्धता और नामों की शुद्धता अहम रहेगी। इतने बड़े स्तर पर चुनाव संपन्न कराने के लिए मतदान दलों को व्यवस्थित तरीके से काम करना होगा। अब देखना होगा कि निर्वाचन व्यवस्था इस चुनौती से निपटने के लिए क्या अतिरिक्त इंतजाम करती है।
नोट: 4.03 करोड़ मतदाताओं, 17 घंटे की समय-सीमा और 40 करोड़ से अधिक नाम लिखने के अनुमान की आधिकारिक पुष्टि निर्वाचन विभाग के आदेशों और चुनाव कार्यक्रम से अवश्य करें।