
राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (RGHS) में 2,000 रुपए से अधिक की जांचों के लिए प्री-अप्रूवल व्यवस्था लागू होने के बाद खर्च में बड़ी कमी दर्ज होने का दावा किया गया है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, महंगी जांचों पर होने वाला खर्च 50.03 करोड़ रुपए से घटकर 9.70 करोड़ रुपए रह गया। इसके साथ ही ऐसी जांचों से जुड़े ट्रांजेक्शन में भी 79 प्रतिशत की गिरावट बताई गई है।
RGHS के तहत महंगी जांचों के लिए पूर्व अनुमति यानी प्री-अप्रूवल की व्यवस्था का उद्देश्य जांचों पर होने वाले खर्च की निगरानी करना है। दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, इस व्यवस्था के बाद संबंधित जांचों पर खर्च में 80.6 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। खर्च में आई यह गिरावट योजना के तहत चिकित्सा जांचों के भुगतान और स्वीकृति प्रक्रिया को लेकर महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
आंकड़ों के अनुसार, 2,000 रुपए से अधिक की जांचों से जुड़े ट्रांजेक्शन में भी करीब 79 प्रतिशत की कमी आई है। प्री-अप्रूवल के तहत ऐसी जांचों के लिए पहले अनुमति की प्रक्रिया पूरी करनी होती है। इससे जांचों की स्वीकृति और खर्च की निगरानी की व्यवस्था मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है।
इस व्यवस्था का उद्देश्य अनावश्यक जांचों और खर्च पर नियंत्रण रखना है। हालांकि, इसके वास्तविक प्रभाव का आकलन करने के लिए यह देखना भी जरूरी होगा कि मरीजों को जरूरी जांच समय पर मिल रही हैं या नहीं और प्री-अप्रूवल के कारण उपचार में किसी तरह की देरी तो नहीं हो रही।
RGHS राजस्थान में पात्र लाभार्थियों को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने वाली महत्वपूर्ण योजना है। ऐसे में खर्च पर नियंत्रण के साथ-साथ मरीजों को समय पर और सुचारु उपचार उपलब्ध कराना भी उतना ही महत्वपूर्ण रहेगा।