
सुप्रीम कोर्ट ने कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों को लेकर शिवसेना (UBT) के सांसद संजय राउत और पत्रकार निखिल वागले को आपराधिक अवमानना मामले में कारण बताओ नोटिस जारी किया है। 16 अक्टूबर 2026 को मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ ने इस मामले में सुनवाई की। मामला न्यायपालिका और मुख्य न्यायाधीश से जुड़ी टिप्पणियों को लेकर उठे विवाद से संबंधित है। निखिल वागले ने 15 अक्टूबर को अपनी विवादित सोशल मीडिया पोस्ट हटाने और मुख्य न्यायाधीश तथा सुप्रीम कोर्ट से बिना शर्त माफी मांगने की बात कही थी। उन्होंने अपनी पोस्ट को भावनात्मक प्रतिक्रिया बताते हुए स्वीकार किया कि उन्हें ऐसी भाषा का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए था।
संजय राउत ने न्यायाधीशों के राजनीतिक कार्यक्रमों में शामिल होने और मुख्यमंत्रियों के साथ भोजन करने का उल्लेख करते हुए विपक्षी नेताओं से मुलाकात नहीं किए जाने पर सवाल उठाए थे। इन टिप्पणियों को लेकर न्यायपालिका की गरिमा और आपराधिक अवमानना के पहलू पर विवाद खड़ा हुआ। भारत के अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने 15 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन को दोनों के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू करने के लिए सहमति दी थी।
सुनवाई के दौरान अदालत ने ऐसी टिप्पणियों को दुर्भाग्यपूर्ण बताया और उम्मीद जताई कि संबंधित लोग अपनी भाषा और बयानों को लेकर गंभीरता से विचार करेंगे। दोनों को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होने से छूट दी गई। संजय राउत ने भी कहा कि यदि सुप्रीम कोर्ट उनकी टिप्पणियों को अनुचित मानता है, तो वे माफी मांगने के लिए तैयार हैं। साथ ही उन्होंने मतदाता सूची से नाम हटाए जाने और शिवसेना के नाम एवं चुनाव चिह्न से जुड़े विवाद में न्याय की मांग दोहराई।
इस मामले में आगे की सुनवाई होनी है। कारण बताओ नोटिस जारी होना अपने आप में दोष सिद्ध होना नहीं है। अदालत दोनों पक्षों का पक्ष सुनने और उपलब्ध तथ्यों पर विचार करने के बाद आगे का निर्णय लेगी।