भारत में रोजाना 1.3 लाख से अधिक साइबर हमलों का दावा; निजी दस्तावेज, फोटो-वीडियो और बैंकिंग जानकारी सुरक्षित रखने की अपील
जयपुर, 3 अगस्त। राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम शाखा ने स्मार्टफोन में निजी और संवेदनशील जानकारी रखने को लेकर आमजन के लिए महत्वपूर्ण एडवाइजरी जारी की है। पुलिस ने चेतावनी दी है कि मोबाइल फोन में पासवर्ड, बैंकिंग पिन, आधार-पैन जैसे दस्तावेज और अन्य संवेदनशील डेटा असुरक्षित तरीके से सेव करना साइबर ठगी, पहचान चोरी और आर्थिक नुकसान का बड़ा कारण बन सकता है।
महानिदेशक पुलिस राजीव कुमार शर्मा के निर्देशानुसार जारी एडवाइजरी में कहा गया है कि आज स्मार्टफोन केवल बातचीत का माध्यम नहीं रह गया है। बैंकिंग से लेकर निजी दस्तावेज, डिजिटल लॉकर, फोटो-वीडियो, ऑफिस ई-मेल और व्यक्तिगत जानकारी तक मोबाइल में मौजूद रहती है। ऐसे में फोन की सुरक्षा को लेकर की गई छोटी सी लापरवाही भी साइबर अपराधियों को संवेदनशील डेटा तक पहुंचने का मौका दे सकती है।
61 प्रतिशत लोग फोन में रखते हैं निजी दस्तावेज
अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस, साइबर क्राइम वीके सिंह ने हाल में सामने आए डेटा लीक और डिजिटल अरेस्ट जैसे मामलों का जिक्र करते हुए बताया कि एक कर्मचारी के ई-मेल से करीब एक टीबी डेटा डार्क वेब पर लीक होने का मामला सामने आया था।
पुलिस की ओर से साझा आंकड़ों के अनुसार 61 प्रतिशत लोग अपने निजी दस्तावेज, 60 प्रतिशत फोटो-वीडियो, 38 प्रतिशत बैंकिंग जानकारी, 48 प्रतिशत ऑफिस ई-मेल, 37 प्रतिशत एआई चैट हिस्ट्री और 34 प्रतिशत लोग अपने पासवर्ड तक मोबाइल फोन में सेव रखते हैं।
एडीजी सिंह के अनुसार भारत में प्रतिदिन 1.3 लाख से अधिक साइबर हमले होते हैं। ऐसे में मोबाइल सुरक्षा को लेकर छोटी सी चूक भी आर्थिक नुकसान के साथ पहचान चोरी का खतरा बढ़ा सकती है।
इन जानकारियों पर साइबर अपराधियों की नजर
राजस्थान पुलिस के मुताबिक साइबर अपराधी मुख्य रूप से पहचान संबंधी दस्तावेज, वित्तीय जानकारी, निजी फोटो-वीडियो और ऑफिस से जुड़े गोपनीय डेटा को निशाना बनाते हैं। आधार, पैन, पासपोर्ट और ड्राइविंग लाइसेंस जैसी जानकारियों का दुरुपयोग फर्जी सिम, बैंक खाता या लोन लेने में किया जा सकता है।
इसी तरह बैंकिंग ऐप, यूपीआई और ओटीपी तक पहुंच बनाकर खाते से रकम निकाली जा सकती है। निजी फोटो-वीडियो और एआई चैट हिस्ट्री का इस्तेमाल ब्लैकमेलिंग में किया जा सकता है, जबकि ऑफिस ई-मेल और गोपनीय दस्तावेजों की चोरी कॉरपोरेट जासूसी और फिरौती जैसे अपराधों का कारण बन सकती है।
फोन सुरक्षित रखने के लिए पुलिस ने दिए ये सुझाव
राजस्थान पुलिस ने लोगों से सार्वजनिक वाई-फाई पर बैंकिंग और संवेदनशील काम करने से बचने की अपील की है। फोन में स्टोरेज एन्क्रिप्शन और मजबूत स्क्रीन लॉक चालू रखने, ऐप्स को केवल जरूरी परमिशन देने तथा बैंकिंग ऐप और महत्वपूर्ण दस्तावेजों को खुले तौर पर गैलरी या होम स्क्रीन पर नहीं रखने की सलाह दी गई है।
पुलिस ने महत्वपूर्ण दस्तावेजों के लिए सिक्योर या हिडन फोल्डर का इस्तेमाल करने, क्लाउड बैकअप को मजबूत पासवर्ड और टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन से सुरक्षित करने तथा ऐप्स केवल आधिकारिक ऐप स्टोर से डाउनलोड करने को कहा है। इसके साथ ही मजबूत और अलग-अलग पासवर्ड इस्तेमाल करने तथा फोन की सुरक्षा संबंधी सेटिंग्स सक्रिय रखने की सलाह दी गई है।
साइबर ठगी होते ही तुरंत करें शिकायत
राजस्थान पुलिस ने कहा कि साइबर ठगी या किसी संदिग्ध गतिविधि का पता चलते ही तुरंत नजदीकी पुलिस थाने या साइबर पुलिस स्टेशन से संपर्क करें। ऑनलाइन साइबर अपराध की शिकायत राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर भी दर्ज कराई जा सकती है। इसके अलावा साइबर हेल्पलाइन 1930 पर तत्काल संपर्क किया जा सकता है।
राजस्थान पुलिस ने साइबर सहायता के लिए 9256001930 और 9257510100 नंबर भी जारी किए हैं।
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि स्मार्टफोन में मौजूद डेटा को लेकर सतर्क रहें और पासवर्ड, बैंकिंग जानकारी तथा निजी दस्तावेजों को असुरक्षित तरीके से सेव करने से बचें।