कोटा में दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान बड़ा हादसा, कोटड़ी नहर में डूबे 4 युवक; तलाश में जुटी गोताखोर टीम
राजस्थान के कोटा से दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान एक दर्दनाक हादसे की खबर सामने आई है। कोटड़ी नहर में विसर्जन के दौरान चार युवकों के डूबने की सूचना से इलाके में हड़कंप मच गया। घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। हादसे की सूचना मिलते ही गोताखोरों की टीम मौके पर पहुंची और नहर में युवकों की तलाश के लिए रेस्क्यू अभियान शुरू किया। टीम नहर में तलाशी अभियान चलाकर युवकों का पता लगाने में जुटी है। धार्मिक आयोजन के दौरान हुए इस हादसे से लोगों में चिंता का माहौल है। फिलहाल, युवकों की स्थिति और हादसे से जुड़ी अन्य जानकारियों की आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है। अपील: प्रतिमा विसर्जन के दौरान गहरे पानी और तेज बहाव वाली जगहों से दूर रहें तथा प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था का पालन करें।
राजस्थान हाईकोर्ट का पंचायत चुनाव पर बड़ा फैसला, मतदाता सूची में हस्तक्षेप से इनकार; याचिका खारिज
हाईकोर्ट ने राजस्थान पंचायत राज चुनाव से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण आदेश देते हुए चुनाव की घोषणा के बाद मतदाता सूची में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। जस्टिस डॉ. नूपुर भाटी की बेंच ने मनोज कुमार गोदारा सहित अन्य याचिकाकर्ताओं की याचिका खारिज कर दी। मामला ग्राम पंचायत मोतीनगरी के वार्ड संख्या दो की मतदाता सूची से जुड़ा है। याचिकाकर्ताओं ने मतदाता सूची से नाम हटाने संबंधी प्रशासनिक आदेशों को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। सुनवाई के दौरान चुनाव प्रक्रिया में न्यायिक हस्तक्षेप की संवैधानिक सीमाओं का मुद्दा सामने आया। हाईकोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 243-O का उल्लेख करते हुए पंचायत चुनावों से संबंधित मामलों में न्यायिक हस्तक्षेप पर लागू संवैधानिक रोक के महत्व पर जोर दिया। इस आदेश के साथ अदालत ने स्पष्ट किया कि चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के बाद उससे जुड़े मामलों में संवैधानिक प्रावधानों का ध्यान रखना आवश्यक है। हालांकि, मामले के विस्तृत आदेश और उसमें दर्ज कानूनी टिप्पणियों के आधार पर ही फैसले के दायरे को पूरी तरह समझा जा सकेगा। पंचायत राज चुनाव से जुड़े इस फैसले को चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची संबंधी विवादों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
किसान आंदोलन में उबाल: बिरधवाल हेड की ओर महाकूच, भारी पुलिस बल तैनात
किसान आंदोलन ने एक बार फिर जोर पकड़ लिया है। बिरधवाल हेड की ओर किसानों के महाकूच के बीच हालात तनावपूर्ण हो गए हैं। किसानों का काफिला पुलिस का पहला नाका तोड़कर आगे बढ़ा। ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और बसों के जरिए बड़ी संख्या में किसान आंदोलन में शामिल होने पहुंचे। पुलिस ने बिरधवाल हेड से करीब 30 किलोमीटर पहले किसानों के काफिले को रोकने का प्रयास किया, जिसके बाद घटनाक्रम ने नया मोड़ ले लिया। पुलिस द्वारा रास्ते में रोके जाने के बाद सैकड़ों किसानों ने अपने वाहन छोड़ दिए और पैदल ही बिरधवाल हेड की ओर कूच करना शुरू कर दिया। किसानों के इस कदम से मौके पर हलचल बढ़ गई। आंदोलन में शामिल किसान आगे बढ़ने पर अड़े रहे, जबकि पुलिस प्रशासन स्थिति को नियंत्रित करने में जुटा रहा। गोपालसर के पास किसान और पुलिस आमने-सामने आ गए। यहां तनावपूर्ण हालात बने हुए हैं। किसानों के लगातार आगे बढ़ने और पुलिस की तैनाती के बीच प्रशासन के सामने कानून-व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती है। अनूपगढ़ के सीओ जयप्रकाश बेनीवाल के नेतृत्व में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। किसानों के कूच के चलते माइलेटी से बिरधवाल हेड तक सड़क मार्ग अवरुद्ध होने की जानकारी सामने आई है। इससे इस मार्ग पर यातायात प्रभावित हुआ है। मौके की स्थिति को देखते हुए लोगों को आवाजाही में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। किसानों के महाकूच के बाद अब सबकी निगाहें बिरधवाल हेड पर टिकी हैं। आंदोलन आगे क्या रुख लेगा और प्रशासन किसानों से बातचीत कर स्थिति को सामान्य कर पाएगा या नहीं, इस पर नजर बनी हुई है। फिलहाल प्राथमिकता मौके पर शांति बनाए रखने और यातायात व्यवस्था बहाल करने की है।
राजस्थान RGHS: 2 हजार से महंगी जांचों के खर्च में 80.6% की गिरावट
राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (RGHS) में 2,000 रुपए से अधिक की जांचों के लिए प्री-अप्रूवल व्यवस्था लागू होने के बाद खर्च में बड़ी कमी दर्ज होने का दावा किया गया है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, महंगी जांचों पर होने वाला खर्च 50.03 करोड़ रुपए से घटकर 9.70 करोड़ रुपए रह गया। इसके साथ ही ऐसी जांचों से जुड़े ट्रांजेक्शन में भी 79 प्रतिशत की गिरावट बताई गई है। RGHS के तहत महंगी जांचों के लिए पूर्व अनुमति यानी प्री-अप्रूवल की व्यवस्था का उद्देश्य जांचों पर होने वाले खर्च की निगरानी करना है। दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, इस व्यवस्था के बाद संबंधित जांचों पर खर्च में 80.6 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। खर्च में आई यह गिरावट योजना के तहत चिकित्सा जांचों के भुगतान और स्वीकृति प्रक्रिया को लेकर महत्वपूर्ण मानी जा रही है। आंकड़ों के अनुसार, 2,000 रुपए से अधिक की जांचों से जुड़े ट्रांजेक्शन में भी करीब 79 प्रतिशत की कमी आई है। प्री-अप्रूवल के तहत ऐसी जांचों के लिए पहले अनुमति की प्रक्रिया पूरी करनी होती है। इससे जांचों की स्वीकृति और खर्च की निगरानी की व्यवस्था मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है। इस व्यवस्था का उद्देश्य अनावश्यक जांचों और खर्च पर नियंत्रण रखना है। हालांकि, इसके वास्तविक प्रभाव का आकलन करने के लिए यह देखना भी जरूरी होगा कि मरीजों को जरूरी जांच समय पर मिल रही हैं या नहीं और प्री-अप्रूवल के कारण उपचार में किसी तरह की देरी तो नहीं हो रही। RGHS राजस्थान में पात्र लाभार्थियों को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने वाली महत्वपूर्ण योजना है। ऐसे में खर्च पर नियंत्रण के साथ-साथ मरीजों को समय पर और सुचारु उपचार उपलब्ध कराना भी उतना ही महत्वपूर्ण रहेगा।
पंचायत चुनाव में हाथ से लिखे जाएंगे करोड़ों नाम! मतदान दलों पर बढ़ेगा काम का बोझ
राजस्थान में पंचायतीराज चुनाव को लेकर मतदान दलों के सामने इस बार बड़ी चुनौती खड़ी होने की संभावना है। प्रदेश में 4.03 करोड़ से अधिक मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे। चुनाव की प्रक्रिया में जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों का चुनाव ईवीएम से कराया जाएगा, जबकि सरपंच और वार्ड पंच के चुनाव मतपत्रों के जरिए होंगे। ऐसे में मतदानकर्मियों को मतपत्रों पर प्रत्याशियों के नाम हाथ से लिखने की जिम्मेदारी निभानी होगी। चुनाव की तैयारियों के दौरान मतदान दलों को मतपत्रों पर प्रत्याशियों के नाम लिखने, उनकी जांच करने और मतदान केंद्रों को तैयार करने जैसे कई काम पूरे करने होंगे। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इन सभी प्रक्रियाओं के लिए अधिकतम 17 घंटे का समय मिलने की बात कही जा रही है। इतने कम समय में सभी व्यवस्थाएं पूरी करना मतदानकर्मियों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है। सरपंच और वार्ड पंच पदों के लिए अलग-अलग मतपत्रों की व्यवस्था रहेगी। प्रत्येक ग्राम पंचायत और वार्ड में प्रत्याशियों की संख्या के अनुसार मतपत्र तैयार करने होंगे। प्रत्याशियों के नाम सही तरीके से लिखना और उनकी जांच करना भी जरूरी होगा, ताकि मतदान के दौरान किसी तरह की परेशानी न आए। दिए गए अनुमान के अनुसार, यदि औसतन प्रत्येक पद के लिए 10 प्रत्याशी मैदान में रहते हैं, तो मतदानकर्मियों को मतपत्रों पर करोड़ों नाम लिखने पड़ सकते हैं। इस प्रक्रिया में 40 करोड़ से अधिक नाम लिखे जाने का अनुमान जताया जा रहा है। इसके अलावा, 20 अतिरिक्त मतपत्रों के प्रावधान से भी मतदान दलों का काम बढ़ सकता है। मतपत्र तैयार करने की प्रक्रिया में समय प्रबंधन, कर्मचारियों की उपलब्धता और नामों की शुद्धता अहम रहेगी। इतने बड़े स्तर पर चुनाव संपन्न कराने के लिए मतदान दलों को व्यवस्थित तरीके से काम करना होगा। अब देखना होगा कि निर्वाचन व्यवस्था इस चुनौती से निपटने के लिए क्या अतिरिक्त इंतजाम करती है। नोट: 4.03 करोड़ मतदाताओं, 17 घंटे की समय-सीमा और 40 करोड़ से अधिक नाम लिखने के अनुमान की आधिकारिक पुष्टि निर्वाचन विभाग के आदेशों और चुनाव कार्यक्रम से अवश्य करें।
मदन राठौड़ के बयान से राजस्थान BJP में हलचल, क्या संगठन में होगा बड़ा बदलाव?
राजस्थान की राजनीति में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के संगठनात्मक बदलावों को लेकर चर्चाएं तेज हैं। प्रदेश में संभावित मंत्रिमंडल फेरबदल की अटकलों के बीच अब पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ की भूमिका और नए प्रदेश अध्यक्ष के संभावित चेहरे को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। हालांकि, प्रदेश अध्यक्ष को बदले जाने को लेकर अभी किसी आधिकारिक फैसले की पुष्टि नहीं है। मदन राठौड़ के पाकिस्तान से जुड़े बयान को लेकर राजनीतिक चर्चाएं जारी हैं। इस बयान के बाद उनके राजनीतिक रुख और पार्टी के भीतर संभावित असर को लेकर अलग-अलग तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। हालांकि, इस मुद्दे के आधार पर उनके पद पर संकट होने का निष्कर्ष निकालना फिलहाल जल्दबाजी होगी। राजस्थान में संभावित मंत्रिमंडल फेरबदल को लेकर चर्चाओं के बीच BJP संगठन में भी बदलाव की संभावना पर नजरें टिकी हैं। राजनीतिक गलियारों में नए प्रदेश अध्यक्ष के नाम को लेकर चर्चा हो रही है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या पार्टी संगठन में नए चेहरे को जिम्मेदारी देगी या मदन राठौड़ अपने पद पर बने रहेंगे। प्रदेश अध्यक्ष के बदलाव को लेकर फिलहाल स्थिति स्पष्ट नहीं है। पार्टी नेतृत्व की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा सामने आने तक इन चर्चाओं को अटकलों के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। आने वाले दिनों में BJP के संगठनात्मक फैसले राजस्थान की सियासत की दिशा को लेकर अहम संकेत दे सकते हैं।
राजस्थान हाईकोर्ट का बड़ा प्रशासनिक कदम, न्यायिक अधिकारियों की अनिवार्य सेवानिवृत्ति के मामलों की समीक्षा करेगी 5 जजों की कमेटी
जोधपुर/जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने न्यायिक अधिकारियों से जुड़े अनिवार्य सेवानिवृत्ति के मामलों की जांच और समीक्षा के लिए पांच न्यायाधीशों की स्क्रीनिंग कमेटी गठित की है। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजय के. अग्रवाल की ओर से गठित इस समिति में हाईकोर्ट के पांच न्यायाधीशों को शामिल किया गया है। इस कदम के तहत जिला न्यायाधीश से लेकर सीनियर सिविल जज और सिविल जज संवर्ग तक के न्यायिक अधिकारियों से संबंधित अनिवार्य सेवानिवृत्ति के मामलों की समीक्षा की जाएगी। गठित स्क्रीनिंग कमेटी में जस्टिस विनीत कुमार माथुर, जस्टिस इंद्रजीत सिंह, जस्टिस अनूप कुमार ढंड, जस्टिस समीर जैन और जस्टिस आशुतोष कुमार को शामिल किया गया है। समिति का दायित्व संबंधित मामलों की जांच और समीक्षा करना होगा। इस प्रशासनिक व्यवस्था का उद्देश्य न्यायिक अधिकारियों की सेवा संबंधी मामलों की निर्धारित प्रक्रिया के तहत समीक्षा सुनिश्चित करना है। कमेटी की ओर से समीक्षा के बाद होने वाली कार्रवाई संबंधित नियमों और लागू प्रक्रिया के अनुरूप होगी।
पूर्व मंत्री महेश जोशी को सुप्रीम कोर्ट से राहत, मुकेश पाठक को भी मिली जमानत
राजस्थान के पूर्व मंत्री महेश जोशी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने महेश जोशी को जमानत दे दी है। इसी प्रकरण के मुख्य आरोपी मुकेश पाठक को भी शीर्ष अदालत से जमानत मिल गई है। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ ने मामले में सुनवाई के बाद यह फैसला सुनाया। इससे पहले 12 अक्टूबर को दोनों पक्षों की बहस पूरी होने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। अब अदालत ने दोनों आरोपियों को जमानत प्रदान कर दी है। इस मामले में याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता अभिमन्यु सिंह सांधू और श्रेयस उदय ललित ने पैरवी की। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को मामले में एक महत्वपूर्ण कानूनी घटनाक्रम माना जा रहा है। हालांकि, जमानत मिलने का अर्थ आरोपों से दोषमुक्त होना नहीं है और मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।
IAS-RAS ट्रांसफर लिस्ट के लिए करना होगा लंबा इंतजार, नए साल में प्रमोशन के साथ सूची आने की संभावना
राजस्थान में IAS और RAS अधिकारियों की बहुप्रतीक्षित ट्रांसफर लिस्ट के लिए अधिकारियों को अभी लंबा इंतजार करना पड़ सकता है। मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए जनवरी के पहले सप्ताह से पहले तबादला सूची जारी होने की संभावना कम बताई जा रही है। ऐसे में अब नए साल में अधिकारियों के प्रमोशन के साथ ही ट्रांसफर लिस्ट आने की संभावना जताई जा रही है। पंचायत चुनावों को लेकर लागू प्रतिबंध 26 नवंबर को हटने की संभावना है, लेकिन इसके बाद भी तबादलों का रास्ता तुरंत साफ नहीं होगा। जानकारी के अनुसार, 2 नवंबर से 2 जनवरी तक मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SSR) का कार्यक्रम प्रस्तावित है। इस अवधि में चुनाव आयोग की ओर से नई प्रतिबंध अवधि लागू रहने के कारण प्रशासनिक स्तर पर तबादला सूची जारी करने में अड़चन आ सकती है। IAS और RAS अधिकारियों की तबादला सूची को लेकर अब नए साल तक इंतजार बढ़ने के संकेत हैं। पंचायत चुनाव और मतदाता सूची पुनरीक्षण के कार्यक्रम के चलते सरकार के सामने तबादलों की समय-सीमा को लेकर चुनौती बनी हुई है। ऐसे में जनवरी के पहले सप्ताह के बाद, अधिकारियों के प्रमोशन की प्रक्रिया के साथ तबादला सूची जारी होने की संभावना जताई जा रही है।
उदयपुर की कामिनी गुर्जर को मिली पीएच.डी. की उपाधि, बाल अधिकारों पर किया तुलनात्मक शोध
उदयपुर, 16 अक्टूबर। जनार्दन राय नागर राजस्थान विद्यापीठ (डीम्ड-टू-बी विश्वविद्यालय), उदयपुर के सामाजिक विज्ञान संकाय की शोधार्थी कामिनी गुर्जर को पीएच.डी. की उपाधि प्रदान की गई है। उन्होंने राजनीति विज्ञान विषय के अंतर्गत बाल अधिकार अधिनियम के प्रति महाविद्यालयों के विद्यार्थियों की जागरूकता, अधिनियम के संदर्भ में उनकी अपेक्षित एवं वास्तविक भूमिका तथा बाल अधिकारों के भारतीय और विदेशी मॉडलों के तुलनात्मक अध्ययन पर शोध कार्य किया है। कामिनी गुर्जर ने अपना शोध प्रबंध राजनीति विज्ञान विभाग की सहायक आचार्य डॉ. एकता हुसैन के निर्देशन में पूरा किया। उनके शोध में बाल अधिकारों के संरक्षण में विद्यार्थियों की भूमिका, अधिनियम के प्रति उनकी समझ और जागरूकता के साथ ही भारत एवं विदेशों में प्रचलित बाल अधिकारों के मॉडलों का विश्लेषण किया गया। शोध का उद्देश्य बाल अधिकारों के प्रति युवाओं की जागरूकता को समझना और उनके संरक्षण में विद्यार्थियों की भूमिका का आकलन करना रहा। कामिनी गुर्जर ने बताया कि बाल अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने और उनके संरक्षण से जुड़ी व्यवस्थाओं को बेहतर ढंग से समझने की दृष्टि से यह शोध महत्वपूर्ण है। उनकी इस शैक्षणिक उपलब्धि पर शुभचिंतकों एवं परिचितों ने बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।