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इंदौर में पश्चिमी क्षेत्रीय पुलिस समन्वय समिति की बैठक, DGP राजीव कुमार शर्मा ने रखा राजस्थान पुलिस का विजन

जयपुर, 7 अगस्त। मध्यप्रदेश के इंदौर स्थित ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में आयोजित 13वीं वेस्टर्न रीजनल पुलिस कोऑर्डिनेशन कमेटी की बैठक में राजस्थान के महानिदेशक पुलिस राजीव कुमार शर्मा ने भाग लिया। बैठक में मध्यप्रदेश, गोवा सहित पश्चिमी क्षेत्र के विभिन्न राज्यों के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने अपराध नियंत्रण, कानून-व्यवस्था और सुरक्षा संबंधी चुनौतियों पर व्यापक मंथन किया। बैठक में राजस्थान पुलिस की ओर से महानिदेशक पुलिस राजीव कुमार शर्मा के साथ अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस (कानून एवं व्यवस्था) वी.के. सिंह, पुलिस महानिरीक्षक के.बी. वंदना तथा चित्तौड़गढ़ के पुलिस अधीक्षक धर्मेंद्र सिंह भी शामिल हुए। अधिकारियों ने अंतरराज्यीय समन्वय, साइबर अपराध रोकथाम और आधुनिक पुलिसिंग से जुड़े विषयों पर अपने सुझाव साझा किए। साइबर अपराध, गुमशुदा बच्चे और नारकोटिक्स पर विशेष चर्चा बैठक के दौरान बड़े धार्मिक आयोजनों की सुरक्षा व्यवस्था, गुमशुदा बच्चों की खोज के नवाचार, साइबर अपराध के नेटवर्क को ध्वस्त करने की रणनीति, आपराधिक न्याय प्रणाली में आधुनिक तकनीक के उपयोग तथा नारकोटिक्स नियंत्रण जैसे अहम विषयों पर विस्तृत प्रस्तुतियां दी गईं। विभिन्न राज्यों के अधिकारियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बेहतर समन्वय पर जोर दिया। राजस्थान पुलिस के नवाचारों की सराहना महानिदेशक पुलिस राजीव कुमार शर्मा ने बैठक में राजस्थान पुलिस द्वारा साइबर अपराध नियंत्रण, तकनीक आधारित पुलिसिंग, कानून-व्यवस्था प्रबंधन और अंतरराज्यीय समन्वय के क्षेत्र में किए जा रहे नवाचारों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि नए आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन के साथ राज्यों के बीच अनुभवों का आदान-प्रदान और आधुनिक तकनीक का उपयोग भविष्य की चुनौतियों से निपटने में अहम भूमिका निभाएगा। साझा रणनीति और भविष्य की कार्ययोजना पर सहमति बैठक में अंतरराज्यीय अपराधों, संगठित अपराध, साइबर अपराध के खिलाफ संयुक्त कार्रवाई, खुफिया सूचनाओं के त्वरित आदान-प्रदान और पुलिस बलों के बीच सहयोग को मजबूत बनाने पर विस्तृत चर्चा हुई। साथ ही विभिन्न राज्यों की श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों को साझा कर उन्हें व्यापक स्तर पर लागू करने पर सहमति बनी। समापन सत्र में पश्चिमी क्षेत्र में पुलिस समन्वय को और अधिक प्रभावी बनाने, साझा कार्ययोजना तैयार करने तथा आगामी समन्वय बैठक के आयोजन को लेकर भी विचार-विमर्श किया गया।

बाड़मेर एसीबी की बड़ी कार्रवाई: ग्राम विकास अधिकारी सपना 4,500 रुपये की रिश्वत लेते ट्रैप

बाड़मेर। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) की बाड़मेर टीम ने बुधवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए जुनाखेड़ा की ग्राम विकास अधिकारी (वीडीओ) सपना को 4,500 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों ट्रैप किया। जानकारी के अनुसार, एसीबी निरीक्षक देवाराम ने अपनी टीम के साथ यह कार्रवाई की। आरोप है कि ग्राम विकास अधिकारी ने प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) के तहत आवास की जियो टैगिंग करने के बदले परिवादी से 4,500 रुपये की रिश्वत की मांग की थी। शिकायत का सत्यापन करने के बाद एसीबी ने योजनाबद्ध तरीके से जाल बिछाया और आरोपी को रिश्वत की राशि लेते हुए गिरफ्तार कर लिया। यह कार्रवाई बाड़मेर एसीबी के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नरेंद्र कुमार के निर्देशन में की गई। ट्रैप के बाद एसीबी की टीम आरोपी से पूछताछ कर रही है और मामले में आवश्यक दस्तावेजों की जांच की जा रही है। साथ ही भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। एसीबी अधिकारियों ने बताया कि मामले की विस्तृत जांच जारी है और रिश्वतखोरी से जुड़े अन्य पहलुओं की भी पड़ताल की जा रही है।

खाकी पर भारी पड़ा घरेलू तनाव: भीलवाड़ा में थाना प्रभारी ने खुद को मारी गोली, गंभीर हालत में उदयपुर रेफर

भीलवाड़ा। भीलवाड़ा जिले के सदर थाना प्रभारी लोकपाल सिंह राठौड़ (38) ने मंगलवार को अपने निजी आवास पर सर्विस रिवॉल्वर से खुद को गोली मार ली। घटना उस समय हुई जब वे ड्यूटी पर गश्त के लिए निकलने की तैयारी कर रहे थे और पुलिस वर्दी में थे। गोली चलने की आवाज सुनकर परिजन मौके पर पहुंचे और उन्हें गंभीर हालत में तत्काल महात्मा गांधी अस्पताल (एमजीएच) ले जाया गया। प्राथमिक उपचार के बाद शहर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन हालत नाजुक होने पर चिकित्सकों ने उन्हें उदयपुर रेफर कर दिया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, थाना प्रभारी मंगलवार सुबह से ही मानसिक तनाव और अवसाद में थे। घटना के समय उनका साला भी घर पर मौजूद था। जैसे ही वह घर से बाहर निकला, लोकपाल सिंह ने अपनी सर्विस रिवॉल्वर से कनपटी पर गोली चला दी। कुछ दिन पहले उनके पिता भी उनसे मिलने आए थे और सोमवार को ही अपने गांव लौटे थे। सूत्रों के मुताबिक, मामला पारिवारिक विवाद और मानसिक तनाव से जुड़ा हो सकता है। लोकपाल सिंह मूल रूप से विजयनगर क्षेत्र के बरल गांव के निवासी हैं और कुछ माह पहले ही उनकी दूसरी शादी हुई थी। पुलिस अब इस पूरे घटनाक्रम के पीछे की वजहों की गहन जांच कर रही है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। पुलिस अधीक्षक सागर राणा, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक राजेश आर्य, सीओ सदर नेमीचंद चौधरी, सीओ सिटी सज्जन सिंह सहित कई वरिष्ठ अधिकारी अस्पताल पहुंचे। एफएसएल और एमओबी की टीमों ने घटनास्थल का निरीक्षण कर साक्ष्य जुटाए तथा सर्विस रिवॉल्वर को जब्त कर लिया है। यह घटना पुलिस महकमे में बढ़ते मानसिक दबाव और पारिवारिक तनाव की ओर भी इशारा करती है। इससे पहले भी भीलवाड़ा पुलिस अपने दो सहायक उप निरीक्षकों महावीर सिंह और विष्णु पद को खो चुकी है। वहीं शाहपुरा थाने के एक जवान ने भी हाल ही में आत्महत्या का प्रयास किया था। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, पिछले छह वर्षों में विभिन्न कारणों से करीब 75 पुलिसकर्मी नौकरी छोड़ चुके हैं। एसपी सागर राणा ने बताया, “सदर थाना प्रभारी लोकपाल सिंह के निजी आवास पर गोली लगने से हेड इंजरी का मामला सामने आया है। गोली लगने के कारणों की जांच की जा रही है। उनकी हालत गंभीर है और बेहतर उपचार के लिए उदयपुर रेफर किया गया है।”

फोन में पासवर्ड-बैंकिंग डिटेल सेव करना पड़ सकता है भारी, राजस्थान पुलिस ने जारी की साइबर एडवाइजरी

भारत में रोजाना 1.3 लाख से अधिक साइबर हमलों का दावा; निजी दस्तावेज, फोटो-वीडियो और बैंकिंग जानकारी सुरक्षित रखने की अपील जयपुर, 3 अगस्त। राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम शाखा ने स्मार्टफोन में निजी और संवेदनशील जानकारी रखने को लेकर आमजन के लिए महत्वपूर्ण एडवाइजरी जारी की है। पुलिस ने चेतावनी दी है कि मोबाइल फोन में पासवर्ड, बैंकिंग पिन, आधार-पैन जैसे दस्तावेज और अन्य संवेदनशील डेटा असुरक्षित तरीके से सेव करना साइबर ठगी, पहचान चोरी और आर्थिक नुकसान का बड़ा कारण बन सकता है। महानिदेशक पुलिस राजीव कुमार शर्मा के निर्देशानुसार जारी एडवाइजरी में कहा गया है कि आज स्मार्टफोन केवल बातचीत का माध्यम नहीं रह गया है। बैंकिंग से लेकर निजी दस्तावेज, डिजिटल लॉकर, फोटो-वीडियो, ऑफिस ई-मेल और व्यक्तिगत जानकारी तक मोबाइल में मौजूद रहती है। ऐसे में फोन की सुरक्षा को लेकर की गई छोटी सी लापरवाही भी साइबर अपराधियों को संवेदनशील डेटा तक पहुंचने का मौका दे सकती है। 61 प्रतिशत लोग फोन में रखते हैं निजी दस्तावेज अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस, साइबर क्राइम वीके सिंह ने हाल में सामने आए डेटा लीक और डिजिटल अरेस्ट जैसे मामलों का जिक्र करते हुए बताया कि एक कर्मचारी के ई-मेल से करीब एक टीबी डेटा डार्क वेब पर लीक होने का मामला सामने आया था। पुलिस की ओर से साझा आंकड़ों के अनुसार 61 प्रतिशत लोग अपने निजी दस्तावेज, 60 प्रतिशत फोटो-वीडियो, 38 प्रतिशत बैंकिंग जानकारी, 48 प्रतिशत ऑफिस ई-मेल, 37 प्रतिशत एआई चैट हिस्ट्री और 34 प्रतिशत लोग अपने पासवर्ड तक मोबाइल फोन में सेव रखते हैं। एडीजी सिंह के अनुसार भारत में प्रतिदिन 1.3 लाख से अधिक साइबर हमले होते हैं। ऐसे में मोबाइल सुरक्षा को लेकर छोटी सी चूक भी आर्थिक नुकसान के साथ पहचान चोरी का खतरा बढ़ा सकती है। इन जानकारियों पर साइबर अपराधियों की नजर राजस्थान पुलिस के मुताबिक साइबर अपराधी मुख्य रूप से पहचान संबंधी दस्तावेज, वित्तीय जानकारी, निजी फोटो-वीडियो और ऑफिस से जुड़े गोपनीय डेटा को निशाना बनाते हैं। आधार, पैन, पासपोर्ट और ड्राइविंग लाइसेंस जैसी जानकारियों का दुरुपयोग फर्जी सिम, बैंक खाता या लोन लेने में किया जा सकता है। इसी तरह बैंकिंग ऐप, यूपीआई और ओटीपी तक पहुंच बनाकर खाते से रकम निकाली जा सकती है। निजी फोटो-वीडियो और एआई चैट हिस्ट्री का इस्तेमाल ब्लैकमेलिंग में किया जा सकता है, जबकि ऑफिस ई-मेल और गोपनीय दस्तावेजों की चोरी कॉरपोरेट जासूसी और फिरौती जैसे अपराधों का कारण बन सकती है। फोन सुरक्षित रखने के लिए पुलिस ने दिए ये सुझाव राजस्थान पुलिस ने लोगों से सार्वजनिक वाई-फाई पर बैंकिंग और संवेदनशील काम करने से बचने की अपील की है। फोन में स्टोरेज एन्क्रिप्शन और मजबूत स्क्रीन लॉक चालू रखने, ऐप्स को केवल जरूरी परमिशन देने तथा बैंकिंग ऐप और महत्वपूर्ण दस्तावेजों को खुले तौर पर गैलरी या होम स्क्रीन पर नहीं रखने की सलाह दी गई है। पुलिस ने महत्वपूर्ण दस्तावेजों के लिए सिक्योर या हिडन फोल्डर का इस्तेमाल करने, क्लाउड बैकअप को मजबूत पासवर्ड और टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन से सुरक्षित करने तथा ऐप्स केवल आधिकारिक ऐप स्टोर से डाउनलोड करने को कहा है। इसके साथ ही मजबूत और अलग-अलग पासवर्ड इस्तेमाल करने तथा फोन की सुरक्षा संबंधी सेटिंग्स सक्रिय रखने की सलाह दी गई है। साइबर ठगी होते ही तुरंत करें शिकायत राजस्थान पुलिस ने कहा कि साइबर ठगी या किसी संदिग्ध गतिविधि का पता चलते ही तुरंत नजदीकी पुलिस थाने या साइबर पुलिस स्टेशन से संपर्क करें। ऑनलाइन साइबर अपराध की शिकायत राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर भी दर्ज कराई जा सकती है। इसके अलावा साइबर हेल्पलाइन 1930 पर तत्काल संपर्क किया जा सकता है। राजस्थान पुलिस ने साइबर सहायता के लिए 9256001930 और 9257510100 नंबर भी जारी किए हैं। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि स्मार्टफोन में मौजूद डेटा को लेकर सतर्क रहें और पासवर्ड, बैंकिंग जानकारी तथा निजी दस्तावेजों को असुरक्षित तरीके से सेव करने से बचें।

राष्ट्रीय मुक्केबाजी में उदयपुर का दम, मनवीर ने जीता स्वर्ण, जीविका को रजत

उदयपुर। जालंधर में आयोजित ऑल इंडिया सेंट्रल स्कूल मुक्केबाजी प्रतियोगिता में उदयपुर के खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए एक स्वर्ण, एक रजत और एक कांस्य पदक अपने नाम किया। खिलाड़ियों की इस उपलब्धि से जिले के खेल जगत में खुशी की लहर है। राज्य क्रीड़ा परिषद के प्रशिक्षक नरपत सिंह चूण्डावत ने बताया कि बॉक्सिंग कोच चेतन सिंह पंवार के नेतृत्व में खिलाड़ियों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। प्रतियोगिता में मनवीर सालवी ने स्वर्ण पदक जीतकर उदयपुर का गौरव बढ़ाया, जबकि जीविका वैष्णव ने रजत पदक और गुरदीप सिंह यादव ने कांस्य पदक हासिल किया। स्वर्ण पदक विजेता मनवीर सालवी अब आगामी एसजीएफआई (SGFI) टूर्नामेंट में सेंट्रल स्कूल का प्रतिनिधित्व करेंगे। खिलाड़ियों की इस सफलता पर खेल प्रेमियों, प्रशिक्षकों और परिजनों ने उन्हें शुभकामनाएं देते हुए उज्ज्वल भविष्य की कामना की।