पंचायत चुनाव में हाथ से लिखे जाएंगे करोड़ों नाम! मतदान दलों पर बढ़ेगा काम का बोझ
राजस्थान में पंचायतीराज चुनाव को लेकर मतदान दलों के सामने इस बार बड़ी चुनौती खड़ी होने की संभावना है। प्रदेश में 4.03 करोड़ से अधिक मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे। चुनाव की प्रक्रिया में जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों का चुनाव ईवीएम से कराया जाएगा, जबकि सरपंच और वार्ड पंच के चुनाव मतपत्रों के जरिए होंगे। ऐसे में मतदानकर्मियों को मतपत्रों पर प्रत्याशियों के नाम हाथ से लिखने की जिम्मेदारी निभानी होगी। चुनाव की तैयारियों के दौरान मतदान दलों को मतपत्रों पर प्रत्याशियों के नाम लिखने, उनकी जांच करने और मतदान केंद्रों को तैयार करने जैसे कई काम पूरे करने होंगे। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इन सभी प्रक्रियाओं के लिए अधिकतम 17 घंटे का समय मिलने की बात कही जा रही है। इतने कम समय में सभी व्यवस्थाएं पूरी करना मतदानकर्मियों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है। सरपंच और वार्ड पंच पदों के लिए अलग-अलग मतपत्रों की व्यवस्था रहेगी। प्रत्येक ग्राम पंचायत और वार्ड में प्रत्याशियों की संख्या के अनुसार मतपत्र तैयार करने होंगे। प्रत्याशियों के नाम सही तरीके से लिखना और उनकी जांच करना भी जरूरी होगा, ताकि मतदान के दौरान किसी तरह की परेशानी न आए। दिए गए अनुमान के अनुसार, यदि औसतन प्रत्येक पद के लिए 10 प्रत्याशी मैदान में रहते हैं, तो मतदानकर्मियों को मतपत्रों पर करोड़ों नाम लिखने पड़ सकते हैं। इस प्रक्रिया में 40 करोड़ से अधिक नाम लिखे जाने का अनुमान जताया जा रहा है। इसके अलावा, 20 अतिरिक्त मतपत्रों के प्रावधान से भी मतदान दलों का काम बढ़ सकता है। मतपत्र तैयार करने की प्रक्रिया में समय प्रबंधन, कर्मचारियों की उपलब्धता और नामों की शुद्धता अहम रहेगी। इतने बड़े स्तर पर चुनाव संपन्न कराने के लिए मतदान दलों को व्यवस्थित तरीके से काम करना होगा। अब देखना होगा कि निर्वाचन व्यवस्था इस चुनौती से निपटने के लिए क्या अतिरिक्त इंतजाम करती है। नोट: 4.03 करोड़ मतदाताओं, 17 घंटे की समय-सीमा और 40 करोड़ से अधिक नाम लिखने के अनुमान की आधिकारिक पुष्टि निर्वाचन विभाग के आदेशों और चुनाव कार्यक्रम से अवश्य करें।
मदन राठौड़ के बयान से राजस्थान BJP में हलचल, क्या संगठन में होगा बड़ा बदलाव?
राजस्थान की राजनीति में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के संगठनात्मक बदलावों को लेकर चर्चाएं तेज हैं। प्रदेश में संभावित मंत्रिमंडल फेरबदल की अटकलों के बीच अब पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ की भूमिका और नए प्रदेश अध्यक्ष के संभावित चेहरे को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। हालांकि, प्रदेश अध्यक्ष को बदले जाने को लेकर अभी किसी आधिकारिक फैसले की पुष्टि नहीं है। मदन राठौड़ के पाकिस्तान से जुड़े बयान को लेकर राजनीतिक चर्चाएं जारी हैं। इस बयान के बाद उनके राजनीतिक रुख और पार्टी के भीतर संभावित असर को लेकर अलग-अलग तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। हालांकि, इस मुद्दे के आधार पर उनके पद पर संकट होने का निष्कर्ष निकालना फिलहाल जल्दबाजी होगी। राजस्थान में संभावित मंत्रिमंडल फेरबदल को लेकर चर्चाओं के बीच BJP संगठन में भी बदलाव की संभावना पर नजरें टिकी हैं। राजनीतिक गलियारों में नए प्रदेश अध्यक्ष के नाम को लेकर चर्चा हो रही है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या पार्टी संगठन में नए चेहरे को जिम्मेदारी देगी या मदन राठौड़ अपने पद पर बने रहेंगे। प्रदेश अध्यक्ष के बदलाव को लेकर फिलहाल स्थिति स्पष्ट नहीं है। पार्टी नेतृत्व की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा सामने आने तक इन चर्चाओं को अटकलों के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। आने वाले दिनों में BJP के संगठनात्मक फैसले राजस्थान की सियासत की दिशा को लेकर अहम संकेत दे सकते हैं।
शीतला माता मंदिर जा रहे श्रद्धालुओं पर कहर, बेकाबू ट्रक ने 13 की जान ली
मध्य प्रदेश के ग्वालियर में नवरात्रि के दौरान शीतला माता मंदिर जा रहे श्रद्धालुओं के साथ भीषण सड़क हादसा हो गया। धान से भरे एक बेकाबू ट्रक ने श्रद्धालुओं को अपनी चपेट में ले लिया। हादसे में अब तक 13 लोगों की मौत होने की खबर है, जबकि 35 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं। घायलों में दो पुलिसकर्मी भी शामिल हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, श्रद्धालु नवरात्रि के अवसर पर शीतला माता मंदिर में दर्शन के लिए जा रहे थे। इसी दौरान धान से भरा ट्रक बेकाबू हो गया और रास्ते में मौजूद श्रद्धालुओं को कुचलता चला गया। ट्रक ने पुलिस बैरिकेड भी तोड़ दिए और मंदिर की बाहरी दीवार तथा गेट से जा टकराया। भीषण हादसे के बाद घटनास्थल पर चीख-पुकार मच गई। आसपास मौजूद लोगों ने घायलों की मदद की और उन्हें अस्पताल पहुंचाने में सहयोग किया। सूचना मिलने पर पुलिस और प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंचीं। घायलों को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। एसएसपी धर्मवीर सिंह के मुताबिक, धान से भरा ट्रक पुलिस बैरिकेड तोड़कर अनियंत्रित हो गया था। इसके बाद ट्रक मंदिर की बाहरी दीवार और गेट से टकरा गया। हादसे में कई श्रद्धालु इसकी चपेट में आ गए। घटना में दो पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं। नवरात्रि के दौरान हुए इस दर्दनाक हादसे से इलाके में शोक का माहौल है। हादसे के कारणों और ट्रक के बेकाबू होने की परिस्थितियों को लेकर आगे की जानकारी का इंतजार है।
न्यायपालिका पर टिप्पणी का मामला, संजय राउत और निखिल वागले को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों को लेकर शिवसेना (UBT) के सांसद संजय राउत और पत्रकार निखिल वागले को आपराधिक अवमानना मामले में कारण बताओ नोटिस जारी किया है। 16 अक्टूबर 2026 को मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ ने इस मामले में सुनवाई की। मामला न्यायपालिका और मुख्य न्यायाधीश से जुड़ी टिप्पणियों को लेकर उठे विवाद से संबंधित है। निखिल वागले ने 15 अक्टूबर को अपनी विवादित सोशल मीडिया पोस्ट हटाने और मुख्य न्यायाधीश तथा सुप्रीम कोर्ट से बिना शर्त माफी मांगने की बात कही थी। उन्होंने अपनी पोस्ट को भावनात्मक प्रतिक्रिया बताते हुए स्वीकार किया कि उन्हें ऐसी भाषा का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए था। संजय राउत ने न्यायाधीशों के राजनीतिक कार्यक्रमों में शामिल होने और मुख्यमंत्रियों के साथ भोजन करने का उल्लेख करते हुए विपक्षी नेताओं से मुलाकात नहीं किए जाने पर सवाल उठाए थे। इन टिप्पणियों को लेकर न्यायपालिका की गरिमा और आपराधिक अवमानना के पहलू पर विवाद खड़ा हुआ। भारत के अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने 15 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन को दोनों के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू करने के लिए सहमति दी थी। सुनवाई के दौरान अदालत ने ऐसी टिप्पणियों को दुर्भाग्यपूर्ण बताया और उम्मीद जताई कि संबंधित लोग अपनी भाषा और बयानों को लेकर गंभीरता से विचार करेंगे। दोनों को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होने से छूट दी गई। संजय राउत ने भी कहा कि यदि सुप्रीम कोर्ट उनकी टिप्पणियों को अनुचित मानता है, तो वे माफी मांगने के लिए तैयार हैं। साथ ही उन्होंने मतदाता सूची से नाम हटाए जाने और शिवसेना के नाम एवं चुनाव चिह्न से जुड़े विवाद में न्याय की मांग दोहराई। इस मामले में आगे की सुनवाई होनी है। कारण बताओ नोटिस जारी होना अपने आप में दोष सिद्ध होना नहीं है। अदालत दोनों पक्षों का पक्ष सुनने और उपलब्ध तथ्यों पर विचार करने के बाद आगे का निर्णय लेगी।
राजस्थान हाईकोर्ट का बड़ा प्रशासनिक कदम, न्यायिक अधिकारियों की अनिवार्य सेवानिवृत्ति के मामलों की समीक्षा करेगी 5 जजों की कमेटी
जोधपुर/जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने न्यायिक अधिकारियों से जुड़े अनिवार्य सेवानिवृत्ति के मामलों की जांच और समीक्षा के लिए पांच न्यायाधीशों की स्क्रीनिंग कमेटी गठित की है। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजय के. अग्रवाल की ओर से गठित इस समिति में हाईकोर्ट के पांच न्यायाधीशों को शामिल किया गया है। इस कदम के तहत जिला न्यायाधीश से लेकर सीनियर सिविल जज और सिविल जज संवर्ग तक के न्यायिक अधिकारियों से संबंधित अनिवार्य सेवानिवृत्ति के मामलों की समीक्षा की जाएगी। गठित स्क्रीनिंग कमेटी में जस्टिस विनीत कुमार माथुर, जस्टिस इंद्रजीत सिंह, जस्टिस अनूप कुमार ढंड, जस्टिस समीर जैन और जस्टिस आशुतोष कुमार को शामिल किया गया है। समिति का दायित्व संबंधित मामलों की जांच और समीक्षा करना होगा। इस प्रशासनिक व्यवस्था का उद्देश्य न्यायिक अधिकारियों की सेवा संबंधी मामलों की निर्धारित प्रक्रिया के तहत समीक्षा सुनिश्चित करना है। कमेटी की ओर से समीक्षा के बाद होने वाली कार्रवाई संबंधित नियमों और लागू प्रक्रिया के अनुरूप होगी।
पूर्व मंत्री महेश जोशी को सुप्रीम कोर्ट से राहत, मुकेश पाठक को भी मिली जमानत
राजस्थान के पूर्व मंत्री महेश जोशी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने महेश जोशी को जमानत दे दी है। इसी प्रकरण के मुख्य आरोपी मुकेश पाठक को भी शीर्ष अदालत से जमानत मिल गई है। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ ने मामले में सुनवाई के बाद यह फैसला सुनाया। इससे पहले 12 अक्टूबर को दोनों पक्षों की बहस पूरी होने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। अब अदालत ने दोनों आरोपियों को जमानत प्रदान कर दी है। इस मामले में याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता अभिमन्यु सिंह सांधू और श्रेयस उदय ललित ने पैरवी की। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को मामले में एक महत्वपूर्ण कानूनी घटनाक्रम माना जा रहा है। हालांकि, जमानत मिलने का अर्थ आरोपों से दोषमुक्त होना नहीं है और मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।
IAS-RAS ट्रांसफर लिस्ट के लिए करना होगा लंबा इंतजार, नए साल में प्रमोशन के साथ सूची आने की संभावना
राजस्थान में IAS और RAS अधिकारियों की बहुप्रतीक्षित ट्रांसफर लिस्ट के लिए अधिकारियों को अभी लंबा इंतजार करना पड़ सकता है। मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए जनवरी के पहले सप्ताह से पहले तबादला सूची जारी होने की संभावना कम बताई जा रही है। ऐसे में अब नए साल में अधिकारियों के प्रमोशन के साथ ही ट्रांसफर लिस्ट आने की संभावना जताई जा रही है। पंचायत चुनावों को लेकर लागू प्रतिबंध 26 नवंबर को हटने की संभावना है, लेकिन इसके बाद भी तबादलों का रास्ता तुरंत साफ नहीं होगा। जानकारी के अनुसार, 2 नवंबर से 2 जनवरी तक मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SSR) का कार्यक्रम प्रस्तावित है। इस अवधि में चुनाव आयोग की ओर से नई प्रतिबंध अवधि लागू रहने के कारण प्रशासनिक स्तर पर तबादला सूची जारी करने में अड़चन आ सकती है। IAS और RAS अधिकारियों की तबादला सूची को लेकर अब नए साल तक इंतजार बढ़ने के संकेत हैं। पंचायत चुनाव और मतदाता सूची पुनरीक्षण के कार्यक्रम के चलते सरकार के सामने तबादलों की समय-सीमा को लेकर चुनौती बनी हुई है। ऐसे में जनवरी के पहले सप्ताह के बाद, अधिकारियों के प्रमोशन की प्रक्रिया के साथ तबादला सूची जारी होने की संभावना जताई जा रही है।
ज़ी सिनेमा पर इस रविवार कार्तिक आर्यन और अनन्या पांडे की रोमांटिक एंटरटेनर ‘तू मेरी मैं तेरा मैं तेरा तू मेरी’ का वर्ल्ड टीवी प्रीमियर, 18 अक्टूबर को दोपहर 12 बजे
मुंबई, 16 अक्टूबर, 2026: एक संयोग भरी मुलाकात, अनपेक्षित प्यार और दिल की ख्वाहिशों व परिवार की जिम्मेदारियों के बीच एक मुश्किल फैसला। इन्हीं के इर्द गिर्द घूमती है ‘तू मेरी मैं तेरा, मैं तेरा तू मेरी’ की कहानी। रोमांस, हँसी मज़ाक, पारिवारिक जज़्बातों और प्यार में पड़ने की खुशी से सजी यह फिल्म दिखाती है कि क्या दो लोग अपने परिवार की उम्मीदों और जिम्मेदारियों के बीच अपने रिश्ते को निभा पाते हैं। देखिए ‘तू मेरी मैं तेरा, मैं तेरा तू मेरी’ का प्रीमियर, ज़ी सिनेमा पर, रविवार, 18 अक्टूबर, दोपहर 12 बजे।समीर विद्वांस के निर्देशन में बनी ‘तू मेरी मैं तेरा, मैं तेरा तू मेरी’ में कार्तिक आर्यन रेहान ‘रे’ मेहरा के किरदार में हैं, जो अमेरिका में रहने वाला एक आत्मविश्वासी और बेफिक्र वेडिंग प्लानर है। वहीं, अनन्या पांडे रूमी वर्धन सिंह के किरदार में हैं, जो एक ऐसे प्यार की तलाश में है, जिसमें सच्चाई हो और रिश्ता दिल से जुड़ा हो। फिल्म की कहानी दो ऐसे लोगों की है, जिनकी सोच और व्यक्तित्व एक दूसरे से बिल्कुल अलग हैं, लेकिन फिर भी वो अनजाने में एक दूसरे की तरफ खिंचे चले आते हैं। हँसी-मज़ाक भरी नोकझोंक, दिल छू लेने वाले पल और अपने परिवारों से गहरे जुड़ाव के बीच उनका रिश्ता धीरे धीरे मजबूत होने लगता है। लेकिन, तभी उन्हें एक मुश्किल हकीकत का सामना करना पड़ता है। अपने परिवार के प्रति उनकी जिम्मेदारियाँ उन्हें साथ भविष्य बनाने से रोक सकते हैं।रोमांस, जज़्बातों और पारिवारिक ड्रामे से सजी यह फिल्म प्यार और फर्ज के बीच संतुलन बनाने की चुनौती को सामने लाती है। यह सवाल भी उठाती है कि क्या रे और रूमी परिवार की उम्मीदों और ज़िंदगी में जरूरी समझौतों के बीच अपने रिश्ते को निभा पाएँगे? फिल्म में जैकी श्रॉफ, नीना गुप्ता और कई अन्य कलाकार भी अहम् सहायक भूमिकाओं में नज़र आएँगे।दिलकश अदाकारी, हल्की फुल्की कॉमेडी, खूबसूरत लोकेशन्स और परिवार के साथ बिताए दिल छू लेने वाले पलों से सजी ‘तू मेरी मैं तेरा, मैं तेरा तू मेरी’ एक ऐसी एंटरटेनर है, जो प्यार, रिश्तों और हमारी ज़िंदगी को आकार देने वाले लोगों की अहमियत का जश्न मनाती है।देखना न भूलें ‘तू मेरी मैं तेरा, मैं तेरा तू मेरी’ का टीवी प्रीमियर, रविवार, 18 अक्टूबर को दोपहर 12 बजे, सिर्फ ज़ी सिनेमा पर।
आईसीआईसीआई लाइफ के मुनाफे में 26.5% की बढ़ोतरी, पहली छमाही में 760 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ
आईसीआईआई लाइफ इंश्योरेंस लिमिटेड के निदेशक मंडल ने 30 सितंबर, 2026 को समाप्त तिमाही के वित्तीय नतीजों को मंजूरी दे दी हैमुंबई, अक्टूबर 2026: वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में कंपनी के व्यक्तिगत सुरक्षा बीमा कारोबार में सालाना आधार पर 47.2% की बढ़ोतरी हुई, जबकि पेंशन और नियमित आय देने वाली वार्षिकी योजनाओं के कारोबार में 50% की वृद्धि दर्ज की गई। इसके परिणामस्वरूप, व्यक्तिगत बीमा का कुल बीमित मूल्य सालाना आधार पर 34.9% बढ़कर 2.32 लाख करोड़ रुपये हो गया। यह ग्राहकों को मिलने वाले बीमा कवर में उल्लेखनीय विस्तार को दर्शाता है।कंपनी का नया कारोबार प्रीमियम पहली छमाही में सालाना आधार पर 25% बढ़कर 11,821 करोड़ रुपये हो गया। नए कारोबार का मूल्य (वीएनबी) 22.3% बढ़कर 1,283 करोड़ रुपये रहा, जबकि वीएनबी मार्जिन 26% दर्ज किया गया। इस दौरान, कंपनी का कर पश्चात लाभ (पीएटी) 26.5% की बढ़ोतरी के साथ 760 करोड़ रुपये पर पहुँच गया।आईसीआईसीआई लाइफ इंश्योरेंस लिमिटेड के मुख्य परिचालन अधिकारी (सीओओ) सिद्धार्थ मिश्रा ने कहा, “ग्राहकों को प्राथमिकता देना हमेशा से आईसीआईसीआई लाइफ के कामकाज का मूल सिद्धांत रहा है और आने वाले वर्षों में भी हमारी सभी गतिविधियों का मार्गदर्शन यही सोच करेगी। सुरक्षा बीमा और वार्षिकी योजनाएँ हमारी दीर्घकालिक रणनीति के केंद्र में हैं। इनके माध्यम से हम भारत में उन जरूरतों को पूरा कर रहे हैं, जिनके लिए अभी पर्याप्त बीमा कवरेज उपलब्ध नहीं है।“उन्होंने कहा कि विविध वितरण नेटवर्क, नए और ग्राहक-केंद्रित उत्पादों, ग्राहकों को प्राथमिकता देने वाली बिक्री एवं सेवा व्यवस्था, उद्योग में बेहतर गुणवत्ता मानकों और मजबूत जोखिम व पूँजी प्रबंधन के दम पर कंपनी उभरते अवसरों का लाभ उठाने में सक्षम है। हमारा लक्ष्य कारोबार, मुनाफे और जोखिम प्रबंधन के बीच संतुलन बनाए रखते हुए नए कारोबार के मूल्य में लगातार और टिकाऊ वृद्धि हासिल करना है।पहली छमाही में कंपनी का दावा निपटान अनुपात 99.3% रहा। जिन दावों में जाँच की जरूरत नहीं थी, उनके निपटान में औसतन 1.1 दिन का समय लगा। इस अवधि में कंपनी ने 2,627 करोड़ रुपये के मृत्यु दावों का निपटान किया और परिपक्वता व उत्तरजीविता लाभ के रूप में 8,634 करोड़ रुपये का भुगतान किया। इससे जरूरत के समय ग्राहकों को समय पर वित्तीय सुरक्षा और मानसिक सुकून देने की कंपनी की प्रतिबद्धता जाहिर होती है।कंपनी का नाम बदलकर ‘आईसीआईसीआई लाइफ इंश्योरेंस लिमिटेड’ कर दिया गया है। यह 25 वर्षों के सफर में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। इस दौरान कंपनी ने 20 करोड़ से अधिक भारतीयों के सपनों और वित्तीय भविष्य को सुरक्षित करने में योगदान दिया है। नए दौर में भी सभी हितधारकों के लिए ‘हर कल आसान’ बनाने की प्रतिबद्धता ग्राहकों को प्राथमिकता देने की सोच के अनुरूप जारी रहेगी।वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में कंपनी ने अपनी 54% बचत बीमा पॉलिसीज़ उसी दिन जारी कीं, जिस दिन उनके लिए आवेदन किया गया था। जीएसटी को छोड़कर प्रीमियम के मुकाबले लागत का अनुपात सालाना आधार पर 30 आधार अंक घटकर 18.3% रह गया। वहीं, बचत बीमा कारोबार में यह अनुपात 90 आधार अंक घटकर 11.6% पर आ गया।
उदयपुर की कामिनी गुर्जर को मिली पीएच.डी. की उपाधि, बाल अधिकारों पर किया तुलनात्मक शोध
उदयपुर, 16 अक्टूबर। जनार्दन राय नागर राजस्थान विद्यापीठ (डीम्ड-टू-बी विश्वविद्यालय), उदयपुर के सामाजिक विज्ञान संकाय की शोधार्थी कामिनी गुर्जर को पीएच.डी. की उपाधि प्रदान की गई है। उन्होंने राजनीति विज्ञान विषय के अंतर्गत बाल अधिकार अधिनियम के प्रति महाविद्यालयों के विद्यार्थियों की जागरूकता, अधिनियम के संदर्भ में उनकी अपेक्षित एवं वास्तविक भूमिका तथा बाल अधिकारों के भारतीय और विदेशी मॉडलों के तुलनात्मक अध्ययन पर शोध कार्य किया है। कामिनी गुर्जर ने अपना शोध प्रबंध राजनीति विज्ञान विभाग की सहायक आचार्य डॉ. एकता हुसैन के निर्देशन में पूरा किया। उनके शोध में बाल अधिकारों के संरक्षण में विद्यार्थियों की भूमिका, अधिनियम के प्रति उनकी समझ और जागरूकता के साथ ही भारत एवं विदेशों में प्रचलित बाल अधिकारों के मॉडलों का विश्लेषण किया गया। शोध का उद्देश्य बाल अधिकारों के प्रति युवाओं की जागरूकता को समझना और उनके संरक्षण में विद्यार्थियों की भूमिका का आकलन करना रहा। कामिनी गुर्जर ने बताया कि बाल अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने और उनके संरक्षण से जुड़ी व्यवस्थाओं को बेहतर ढंग से समझने की दृष्टि से यह शोध महत्वपूर्ण है। उनकी इस शैक्षणिक उपलब्धि पर शुभचिंतकों एवं परिचितों ने बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।