दुनिया भर में भारतीय पासपोर्ट की हैसियत थोड़ी कमजोर हुई है। ग्लोबल पासपोर्ट इंडेक्स (GPI) 2026 की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, भारत 197 मुल्कों की फेहरिस्त में एक पायदान नीचे खिसककर 125वें मकाम पर आ गया है। ताज्जुब की बात यह है कि हमारा पासपोर्ट नामीबिया, फिलीपींस और उज्बेकिस्तान जैसे मुल्कों से भी पीछे हो गया है। वहीं पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान इस लिस्ट में 188वें नंबर पर है। अब भारतीय पासपोर्ट धारकों को अमेरिका, ब्रिटेन और यूएई समेत 88 मुल्कों में जाने के लिए वीजा लेना लाज़मी होगा।इन दिनों पासपोर्ट एक और वजह से चर्चा में है। सरकार के कुछ अफसरों का कहना था कि पासपोर्ट सिर्फ सफर का दस्तावेज है, नागरिकता का नहीं। लेकिन इस अहम मुद्दे पर भारत के पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज मदन बी. लोकुर ने साफ लफ्जों में कहा है कि पासपोर्ट हुकूमत की तरफ से दिया गया वो सबसे पुख्ता सुबूत है, जो आपको पूरी दुनिया में एक हिंदुस्तानी शहरी (नागरिक) के तौर पर मान्यता दिलाता है।